
This poem was written for a poetry competition but couldn’t submit it as they wanted entries in English only..soo..thought of sharing it with you…my friends who really ‘zelofy’ my Hindi poetry ;)
With this poem I would like to wish all of you a wonderful..colorful..superb…Holi.. :-)
कृष्ण-युग से चली आ रही है ये परंपरा,
नृसिंह भगवान ने हिरण्यकश्यपु को मारा था जहाँ न था अंबर न थी धरा,
युगकथा से चली आ रही है कहानी "भक्त प्रहलाद",
करते है उनकी श्रध्धा को इस त्यौहार के साथ हरकोई याद,
होता है जब होली का दहन,
जलता है हर अहम,हर भरम,
सोचो तो अगर गहन,
और होली उत्सव बिना रंगों के तो है व्यर्थ,
हर गिले-शिकवे को मिटाने में है ये समर्थ,
हर रंग अपने आप में बयान करता है कोई अर्थ,
उड़ता है हर जगह खुशियों का गुलाल
बस थोडा सा ही रंग कर देता है कमाल,
यह है होली का त्यौहार ,
दे के जाता है खुशियों का उपहार,
हर प्रान्त में अनूठे अंदाज़ से मानते है लोग इसे और बांटते है अपनों में प्यार,
आपको भी होली का उत्सव हो मुबारक,
हर दिन बीते हसी क साथ और छोड़ जाये मन में यादो का स्मारक!!
होली की शुभकामनाए
