कभी झूठ से डरे ये ..
कभी सच को न झेल पाए ये !..
एय मन तेरी खुदगर्ज़ी को कैसे समझ पाए !!
कभी डरे तू सो सच के बाद के एक झूठ से ..
कभी सो झूठ के बाद का एक सच तुझे टटोल जाए ..
एय मन तेरी खुदगर्ज़ी को कैसे समझ पाए !!
खुद का राजा और खुद ही का ग़ुलाम तू बन जाये ..
जब ना मिले किसी औरकी गलती तो खुद ही को दोषी मान जाये ..
एय मन तेरी खुदगर्ज़ी को कैसे समझ पाए !!
Sometimes I wonder what hurts the most...!! Truth or Lie or both ...